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Signs of Pitra dosha

क्या आपने कभी सोचा है की ऐसा क्यों होता है जैसे :--------  किसी धार्मिक स्थान पे दर्शनों के लिए गए और रास्ते में एक्सीडेंट हो जाना किसी धर्म स्थान पे गए और पीछे से चोर घर साफ़ कर गए घर में ख़ुशी का माहोल बना यानि लड़के की सगाई की और और घर में कोई बीमार या किसी की मौत या कारोवार चोपट लड़के के जन्म के बाद कोई बीमार या मोत या कोई और परेशानी जैसे हस्पताल कोट कचहरी के चकर लड़ाई झगड़ा आदि मकान बनाना शुरू ही किया था और कोई परेशानी खड़ी हो गई जैसे जैसे माँ बाप या कोई बच्चा बीमार या किसी की मौत हो जाना नई गाड़ी लेकर आ रहे रास्ते में ही एक्सीडेंट और किसी न किसी की मौत हो जाना अचानक घर में किसी की मौत होना अचानक किसी को हस्पताल जाना पड़ जाये अचानक ही किसी को जेल जाना पड़ जाये सगाई के तुरंत बाद लड़का या लड़की बीमार या दोनों में से किसी का एक्सीडेंट बच्चा पेट में आते ही पिता बीमार या जेल या कारोवार चोपट शादी के तुरंत बाद घर में किसी बड़ी आफत का आना जैसे आपने कई बार सुना होगा या अखवारों में पड़ा होगा की दूल्हे की कार का एक्सीडेंट हो गया दूल्हा या दुल्हन मर गई और बाकी किसी को खरोंच भी नहीं आई ज्योतिष वो विद्या...

RAHU IN ALL HOUSES IN YOUR HOROSCOPE

राहू अलग अलग भावो मे : प्रथम भाव महत्वकांक्षी, कुलाभिमानी, पिच्छली ३ पेढियो मे कोई कुलदीपक हुआ हो, विवाद मे कुशल, दुष्ट बुध्धिवाला द्वितीय भाव धनप्राप्ति के लिये कुछ भी करने वाला, झूठ बोलने वाला,व्यसनी तृतिया भाव ध्येय के प्रती आत्मसमर्पन, सौतेले भाइ-बहन होने की संभावना, प्रवासी, लडैया, नाये धरम और तत्व का प्रवर्तक,लोक-विलक्षन कार्य करनेवाला,संकट पर विजय प्राप्त करनेवाला चतुर्थ भाव विध्याप्राप्ति मे विध्न, इछित विध्या प्राप्त ना हो,अल्प संतती, धर्म विरोधक,प्रवास मे कष्ट पंचम भाव पिता से बैर, ममा-मौसी से बैर, विध्याप्राप्ति मे बाधा फिरभी विध्या प्राप्त हो,कला, कुशलता, खेती-बाढी, संतान प्राप्ति मे बाधा, कब्ज छ्ठा भाव युध्धप्रेमी, नेत्रुत्व करनेवाला, अतिकामी, स्त्री-लंपट, ननीहाल का सुख कम सप्तम भाव पैसे खने का अरोप लग सकता है, अपनी नजरो के सामने स्वजनो का नाश, किसी कुटुम्बिजन का आपघात से मृ‍त्यु, खर्चिला,लोकनिन्दा अष्टम भाव भागीदारी मे चीटिंग, प्रियजन से वियोग, पत्नी का नाश नवम भाव धर्मविरोधी तत्व वाला, जानबुझ के गलत रस्तो पर चलनेवाला,पितृधन का नाश दशम भाव सार्वजनिक क्षेत्र मे नुकशान, भाई...

KETU IN ALL HOUSES IN YOUR HOROSCOPE

केतु अलग अलग भावो मे : प्रथम भाव बंधुओ से कलेश,वातपीड़ा ,अस्थिर चित्त, चिंतातुर द्वितीय भाव कुटुम्ब से ,मित्र से विरोध, खराबवाणी, धनहानि तृतिया भाव शत्रुनाश ,पराक्रमी,ऐश्वर्य की प्राप्ति,हाथ मे पीड़ा चतुर्थ भाव मातृसुख मे कमी,निंदा करनेवाला,वतन छोड़ना पड़े पंचम भाव सन्तान प्राप्ति मे कष्ट,पेट सम्बंधित ऑपरेशन, मंत्र-तंत्र मे रुचि छ्ठा भाव ननिहाल मे मान-भंग हो, शत्रुनाश ,रोग शीघ्र हो या दूर हो सप्तम भाव जल-भय, वैवाहिक जीवन मे दरार,प्रवासी, वीर्य से सम्बंधित रोग अष्टम भाव गुदा रोग,अकस्मात,ऑपरेशन, विरासत मिलने मे तकलीफ नवम भाव हल्की जाती के लोगो के ध्वारा भाग्योदय,धर्म परिवर्तन,पितृध्वेषि दशम भाव चार पग वाले पशू से घायल हो, पिता से मतभेद,व्यापार के लिये अशुभ, एकादश भाव सभी प्रकार के लाभ प्राप्त हो, तेजस्वी, शास्त्राभ्यास ध्वादश भाव मोक्ष कारक, गुप्तरोग

Benefits Of worshiping Shami Tree

1. If Saturn is creating problem in life then it is good to offer a mustard oil deepak under shami tree. This will give benefit in life. 2. If shani sade sati is going on then also it is good to worship shami tree to get the blessings of shani deva. 3. If any type of land problem is going on then also shami pooja will give benefit. 4. In Maharashtra, North Karnataka, Madhya Pradesh there is a tradition to give shami leaves to the friends, relatives etc for good luck on the auspicious day of Dushera celebration. 5. Shami wood is used in shani pooja. 6. If any one worship shami tree at least on saturday regularly then no doubt the blessings of shani will make the life of person smooth. If the Saturn is in good in horoscope then planting shami tree in West direction of house will give benefit to the person. So worship shami tree, make your life bright with shami, remove hurdles by worshipping shami.

lesson of Chanakya

चाणक्य की सीख चाणक्य एक जंगल में झोपड़ी बनाकर रहते थे। वहां अनेक लोग उनसे परामर्श और ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे। जिस जंगल में वह रहते थे, वह पत्थरों और कंटीली झाडि़यों से भरा था। चूंकि उस समय प्राय: नंगे पैर रहने का ही चलन था, इसलिए उनके निवास तक पहुंचने में लोगों को अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता था। वहां पहुंचते-पहुंचते लोगों के पांव लहूलुहान हो जाते थे। एक दिन कुछ लोग उस मार्ग से बेहद परेशानियों का सामना कर चाणक्य तक पहुंचे। एक व्यक्ति उनसे निवेदन करते हुए बोला, ‘आपके पास पहुंचने में हम लोगों को बहुत कष्ट हुआ। आप महाराज से कहकर यहां की जमीन को चमड़े से ढकवाने की व्यवस्था करा दें। इससे लोगों को आराम होगा।’ उसकी बात सुनकर चाणक्य मुस्कराते हुए बोले, ‘महाशय, केवल यहीं चमड़ा बिछाने से समस्या हल नहीं होगी। कंटीले व पथरीले पथ तो इस विश्व में अनगिनत हैं। ऐसे में पूरे विश्व में चमड़ा बिछवाना तो असंभव है। हां, यदि आप लोग चमड़े द्वारा अपने पैरों को सुरक्षित कर लें तो अवश्य ही पथरीले पथ व कंटीली झाडि़यों के प्रकोप से बच सकते हैं।’ वह व्यक्ति सिर झुकाकर बोला, ‘हां गुरुजी, मैं अब ऐसा ही कर...

REMEDIES FOR PITRA DOSHA (PITRA DOSHA NIVARAN KE UPAY )

पित्र दोष निवारण के उपाय 1. याद रखे घर के सभी बड़े बुजर्ग को हमेशा प्रेम, सम्मान, और पूर्ण अधिकार दिया जाय , घर के महत्वपूर्ण मसलों पर उनसे सलाह मशविरा करते हुए उनकी राय का भी पूर्ण आदर किया जाय ,प्रतिदिन उनका अभिवादन करते हुए उनका आशीर्वाद लेने, उन्हे पूर्ण रूप से प्रसन्न एवं संतुष्ट रखने से भी निश्चित रूप से पित्र दोष में लाभ मिलता है । 2.अपने ज्ञात अज्ञात पूर्वजो के प्रति ईश्वर उपासना के बाद उनके प्रति कृतज्ञता का भाव रखने उनसे अपनी जाने अनजाने में की गयी भूलों की क्षमा  माँगने से भी पित्र प्रसन्न होते है । 3. सोमवती अमावस्या को दूध की खीर बना, पितरों को अर्पित करने से भी इस दोष में कमी होती है । 4. सोमवती अमावस्या के दिन यदि कोई व्यक्ति पीपल के पेड़ पर मीठा जल मिष्ठान एवं जनेऊ अर्पित करते हुये “ऊँ नमो भगवते वासुदेवाएं नमः” मंत्र का जाप करते हुए कम से कम सात या 108 परिक्रमा करे तत्पश्चात् अपने अपराधों एवं त्रुटियों के लिये क्षमा मांगे तो पितृ दोष से उत्पन्न समस्त समस्याओं का निवारण हो जाता है। 5.प्रत्येक अमावस्या को गाय को पांच फल भी खिलाने चाहिए। 6. अमावस्या को बबूल के पेड़ पर ...

benefits of drinking water in copper utensils ( tambe ke bartan me pani peene ke fayde)

सुबह उठ कर ताम्बे के बर्तन के पानी पीने के लाभ कहा जाता है कि रात को तांबे के पात्र में पानी रख दें और सुबह इस पानी को पिएं तो अनेक फायदे होते हैं। आयुर्वेद मे ं कहा गया है कि यह पानी शरीर के कई दोषों को शांत करता है। साथ ही, इस पानी से शरीर के जहरीले तत्व बाहर निकल जाते हैं। रात को इस तरह तांबे के बर्तन में संग्रहित पानी को ताम्रजल के नाम से जाना जाता है। ये ध्यान रखने वाली बात है कि तांबे के बर्तन में कम से कम 8 घंटे तक रखा हुआ पानी ही लाभकारी होता है । जिन लोगों को कफ की समस्या ज्यादा रहती है, उन्हें इस पानी में तुलसी के कुछ पत्ते डाल देने चाहिए। बहुत कम लोग जानते हैं कि तांबे के बर्तन का पानी पीने के बहुत सारे फायदे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं तांबे के बर्तन में रखे पानी को पीने से होने वाले कुछ बेहतरीन फायदों के बारे में: • स्किन को बनाए स्वस्थ- अधिकतर लोग हेल्दी स्किन के लिए तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स का उपयोग करते हैं। वो मानते हैं कि अच्छे कॉस्मेटिक्स यूज करने से त्वचा सुंदर हो जाती है, लेकिन ये सच नहीं है। स्किन पर सबसे अधिक प्रभाव आपकी दिनचर्या और खानपान का पड़ता है। इसीलिए ...